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As Pakistan takes SCO Chair, Modi slams use of terrorism as strategic asset

Mark Hernandez - thedeshpost.com 1 min read

SCO शिखर सम्मेलन में मोदी ने पाकिस्तान को भेजा स्पष्ट संदेश: आतंकवाद किसी भी देश की रणनीति नहीं बन सकता Thedeshpost.com – शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन की मंच…

As Pakistan takes SCO Chair, Modi slams use of terrorism as strategic asset

SCO शिखर सम्मेलन में मोदी ने पाकिस्तान को भेजा स्पष्ट संदेश: आतंकवाद किसी भी देश की रणनीति नहीं बन सकता

Thedeshpost.com – शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन की मंच पर एक ऐसी बात कही गई, जिसका सीधा निशाना पाकिस्तान था — भले ही नाम नहीं लिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा को क्षेत्रीय विकास का अटल-अचल आधार घोषित करते हुए कहा कि जो भी देश आतंकवाद को अपनी राज्य नीति का हथियार बनाता है और आतंकवादियों को आश्रय-सहायता प्रदान करता है, उसे एक दृढ़ संदेश दिया जाना चाहिए। इस बयान का समय-संदर्भ और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि पाकिस्तान ने मंगलवार को किरगिज़स्तान से SCO की घूर्णी अध्यक्षता संभाली है और अगले वर्ष शीर्ष-स्तरीय सम्मेलन की मेज़बानी करेगा, जिसकी आमंत्रित सूची में मोदी समेत सभी सदस्य-राष्ट्रों के प्रमुख शामिल होंगे।

द्वैत-समस्याओं पर SCO चार्टर की चुप्पी और उस चुप्पी के बीच का संकेत

SCO चार्टर के नियमों के अनुसार सदस्य-राष्ट्र एक-दूसरे पर द्वैत-स्तर की शिकायतें उठा नहीं सकते। यही कारण है कि मोदी ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया। फिर भी, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शेहबाज़ शरीफ की मौजूदगी में यह बयान एक सीधा, बिना किसी धुंधलापन का चेतावनी संदेश था। मोदी ने कहा कि आतंकवाद को रोकने के लिए केवल क्रिया-प्रतिक्रिया की सीमा में बंधे रहना पर्याप्त नहीं है।

“हमें आतंकवादी वित्तपोषण, भर्ती, द्रव्यवादीकरण और सुरक्षित स्थानों के पूरे पारिस्थितिकी-तंत्र को तोड़ना होगा। हमें एक ही आवाज़ में बोलना होगा और स्पष्ट करना होगा कि इस गंभीर मुद्दे पर दोहरे मानदंडों की कोई जगह नहीं हो सकती।”

यह बयान उस संदर्भ में आया है जहाँ भारत और पाकिस्तान दोनों ने 2017 में चीन-प्रधान यूरो-एशियाई समूह को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया था। भारत के लिए SCO ने केवल रणनीतिक स्वायत्तता का प्रदर्ण-मंच नहीं, बल्कि राज्य-सponsored आतंकवाद से उत्पन्न क्षेत्रीय जोखिमों को उजागर करने का एक औपचारिक मंच भी प्रदान किया है।

“सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर” — मोदी की SCO दृष्टि का विस्तार

मोदी ने पिछले वर्ष तियान्जिन में प्रस्तुत की गई भारत की SCO दृष्टि — सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर — के विस्तार पर चर्चा की। चीनी राष्ट्रपति शी चिनपिंग की उपस्थिति में उन्होंने दोहराया कि सभी कनेक्टिविटी प्रयासों को सभी राष्ट्रों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना होगा, क्योंकि यही SCO चार्टर का “मूल आत्मा” भी है।

भारत का यह lập यह है कि कनेक्टिविटी केवल बुनियादी-संरचना का विस्तार नहीं, बल्कि एक राजनीतिक-राजनीतिक समझौता है जो संप्रभुता की रेखाओं के भीतर ही काम करता है। जब तक यह शर्त पूरी होती है, भारत बाज़ारों को जोड़ने, व्यापार को बढ़ाने और विकास के नए अवसर खोलने वाले प्रयासों का समर्थन करता है।

अफ़ग़ानिस्तान और पश्चिम एशिया: क्षेत्रीय स्थिरता के दो अक्ष

मोदी ने SCO के साझा आदर्श — एक शांत और सुरक्षित यूरो-एशिया — को अफ़ग़ानिस्तान में शांति और स्थिरता से सीधे जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत इस देश के लोगों के विकास और मानवीय सहायता प्रदान करने में निरंतर योगदान देता रहेगा।

पश्चिम एशिया की संकट-स्थिति पर भी मोदी ने प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह संकृत ऊर्जा-सुरक्षा, समुद्री व्यापार और वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखलाओं को प्रभावित कर रहा है।

“ग्लोबल साउथ के देशों को ऐसे व्यवधानों का सबसे बड़ा बोझ उठाना पड़ता है। इसलिए भारत ने निरंतर कहा है कि सभी तनाव और संघर्षों को युद्धभूमि पर नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।”

SCO का अगले 25 वर्ष: नागरिक-सहयोग का केंद्र

SCO को “महान सभ्यताओं, संस्कृतियों और विचारों का संगम” कहते हुए मोदी ने कहा कि अगले 25 वर्षों में सदस्य-राष्ट्रों के बीच सहयोग का हृदय जन-से-जन संबंधों में ही रहना चाहिए। उन्होंने सफलता की मापदंड को साधारण-जनजीवन के संदर्भ में परिभाषित किया:

“हमारी सफलता का वास्तविक माप यह है कि हमारे प्रयास युवाओं के लिए कितने नए अवसर पैदा करते हैं, हमारे उद्यमियों के लिए कितने नए बाज़ार खुलते हैं, हमारे किसानों को प्रौद्योगिकी से कितना लाभ मिलता है, और हमारे नागरिकों के जीवन में कितना सुधार होता है।”

भारत के आधिकारिक विवरण के अनुसार, मोदी ने मज़बूत और विश्वसनीय कनेक्टिविटी प्रयासों को समूह की साझा प्रगति और समृद्धि के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने प्रौद्योगिकी, उद्यमिता, नवाचार, स्टार्ट-अप और जन-से-जन पहल को SCO देशों के लोगों के लिए विशाल अवसरों का स्रोत बताया।

संदर्भ और प्रभाव

SCO की घूर्णी अध्यक्षता का अर्थ यह है कि अगले वर्ष पाकिस्तान शीर्ष-स्तरीय बैठक की मेज़बानी करेगा, जिसमें सभी सदस्य-राष्ट्रों के प्रमुख शामिल होंगे। इस संदर्भ में मोदी का वर्तमान बयान एक पूर्व-संकेत है — यह बताता है कि भारत अगली बैठक में भी सुरक्षा-संदर्भ को केंद्र में रखेगा और द्वैत-समस्याओं को बहुपक्षीय मंच पर उठाने का प्रयास जारी रखेगा। SCO के भीतर चीन की प्रभावी भूमिका को देखते हुए, भारत का यह रुख उसकी रणनीतिक स्वायत्तता की एक स्पष्ट अभिव्यक्ति है — न तो पूर्ण सहयोग, न पूर्ण विरोध, बल्कि शर्तों-सहित सहभागिता।

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