Indian consulate in UAE issues warning over biometric fraud targeting nationals
UAE में भारतीय नागरिकों की उंगलियों और चेहरे की स्कैन से धोखाधड़ी: दबई कंसुलेट ने जारी किया सतर्कता संदेश Thedeshpost.com – अरब देशों में काम करने वाले लाखों भारतीय श्रमिकों…
UAE में भारतीय नागरिकों की उंगलियों और चेहरे की स्कैन से धोखाधड़ी: दबई कंसुलेट ने जारी किया सतर्कता संदेश
Thedeshpost.com – अरब देशों में काम करने वाले लाखों भारतीय श्रमिकों के लिए एक नया खतरा सामने आया है — उनकी उंगलियों के निशान और चेहरे की डिजिटल छवि का गलत इस्तेमाल। दबई स्थित भारत के महाक़ुलवकाल ने सोमवार को एक आधिकारिक सलाहकार संदेश जारी करके UAE में रहने वाले भारतीय नागरिकों, विशेषकर नीले कragen वर्कर्स को, अपनी बायोमेट्रिक जानकारी किसी भी अनधिकृत व्यक्ति या एजेंट को सौंपने से बचने की सख्त चेतावनी दी है। यह चेतावनी तब आई जब यह खबर सामने आई कि कुछ ठगों ने वीज़ा नियमन, आपात प्रमाणपत्र, एग्ज़िट परमिट, एमिरेट्स आईडी या रोज़गार से जुड़े प्रक्रियाओं में मदद का बहाना देकर भारतीयों की उंगलियों के निशान और चेहरे की स्कैन छीन ली है।
धोखाधड़ी की तस्वीर: बायोमेट्रिक डेटा से क्या हो सकता है
महाक़ुलवकाल के संदेश के मुताबिक, ये ठग पीड़ितों से उंगलियों के निशान या चेहरे की स्कैन माँगते हैं। इसके बाद, बिना पीड़ित की जानकारी के, वे इन बायोमेट्रिक डेटा का इस्तेमाल वित्तीय लेन-देन, बैंक खाता खोलना, लोन या क्रेडिट कार्ड प्राप्त करने जैसी गतिविधियों में कर सकते हैं। इसका सीधा असर यह होता है कि पीड़ित ऐसे वित्तीय दायित्वों या लेन-देन के लिए ज़िम्मेदार ठहराए जा सकते हैं जिनकी उन्होंने कभी मंज़ूरी नहीं दी। कुछ मामलों में प्रभावित व्यक्तियों पर कई जुर्माने, यात्रा प्रतिबंध और गिरफ्तारी तक की सज़ाएँ भी हो सकती हैं।
यह खतरा विशेषतः उन भारतीय श्रमिकों के लिए गंभीर है जो UAE में निर्माण, होटल, परिवहन या अन्य सेवा क्षेत्रों में काम करते हैं और जिनके पास वीज़ा या दस्तावेज़ों से जुड़ी प्रक्रियाओं को समझने की तकनीकी या भाषाई सुविधा सीमित होती है। ऐसे लोगों को अक्सर “मदद” का बहाना देकर बायोमेट्रिक जानकारी माँगी जाती है, जबकि वास्तव में यह जानकारी बाद में उनके नाम से वित्तीय गतिविधियों में इस्तेमाल होती है।
आधिकारिक प्रक्रिया में बायोमेट्रिक डेटा कहाँ देना चाहिए
महाक़ुलवकाल ने स्पष्ट किया है कि एग्ज़िट परमिट, एमिरेट्स आईडी या वीज़ा नियमन जैसी प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक बायोमेट्रिक जानकारी केवल UAE सरकार की आधिकारिक सुविधाओं या काउंटर्स पर ही प्रदान की जानी चाहिए। निजी व्यक्तियों, एजेंटों या तीसरे पक्ष सेवा प्रदाताओं के माध्यम से ऐसी जानकारी जमा करने से बिल्कुल बचना चाहिए, चाहे वे UAE प्राधिकारियों द्वारा अधिकृत होने का दावा क्यों न करें।
कंसुलर सेवाओं के लिए बायोमेट्रिक स्कैन की ज़रूरत नहीं
एक आम भ्रम को दूर करने के लिए महाक़ुलवकाल ने विशेष स्पष्टता दी है। संदेश में कहा गया है:
“दबई में भारत का महाक़ुलवकाल और अबू धाबी में भारतीय दूतावास पासपोर्ट या आपात प्रमाणपत्र जारी करने के लिए आवेदकों से किसी भी उंगलियों के निशान या चेहरे/आँख की स्कैन की माँग नहीं करते।”
इसका मतलब यह है कि यदि कोई व्यक्ति या एजेंट भारतीय दूतावास या कंसुलेट का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हुए ऐसी जानकारी माँग रहा है, तो वह धोखाधड़ी की गतिविधि में शामिल है और उससे कोई बात नहीं करनी चाहिए।
पीड़ितों के लिए तत्काल संपर्क मार्ग
जो भी भारतीय नागरिक किसी अनधिकृत व्यक्ति द्वारा बायोमेट्रिक डेटा या एमिरेट्स आईडी माँगने की स्थिति का शिकार हो, उसे तुरंत प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र (PBSK) से संपर्क करना चाहिए। संपर्क के लिए टोल-फ्री नंबर, WhatsApp या SMS उपलब्ध हैं, और ईमेल के माध्यम से pbsk.dubai@mea.gov.in पर भी सहायता माँगी जा सकती है। इन चैनलों के ज़रिए अपनी पहचान की सत्यापन या किसी भी प्रकार की सहायता प्राप्त की जा सकती है।
सावधानता के सिद्धांत: नागरिकों पर क्या ज़िम्मेदारी है
महाक़ुलवकाल ने UAE में रहने या यात्रा करने वाले सभी भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे सावधानता बरतें। किसी भी ऐसे व्यक्ति की पहचान स्वतंत्र रूप से सत्यापित करें जो आप्रवासन या दस्तावेज़-संबंधी सेवाएँ प्रदान करने का दावा कर रहा हो। संदिग्ध गतिविधियों को भारतीय कंसुलेट और संबंधित UAE प्राधिकारियों को तुरंत रिपोर्ट करें।
यह चेतावनी उस बड़े संदर्भ में आती है जहाँ UAE में भारतीय समुदाय की संख्या लाखों में है और बायोमेट्रिक प्रणालियाँ अब दैनिक जीवन के कई पहलुओं — बैंकिंग, यात्रा, रोज़गार — में गहरी तरह समाहित हो चुकी हैं। एक बार बायोमेट्रिक डेटा लीक हो जाने के बाद उसे वापस पाना या बदलना लगभग असंभव है, इसलिए इसे अपनी पहचान के समान ही संवेदनशील मानना चाहिए। नागरिकों को चाहिए कि वे किसी भी “तेज़ी से काम पुरा करने” के वादे पर भरोसा न करें और हर प्रक्रिया का रास्ता आधिकारिक चैनलों से ही अपनाएँ।
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