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Cauvery dispute: How Tamil Nadu and Karnataka are pulling Congress in two directions

Mark Smith 1 min read 8 views

कैवेरी विवाद: कैसे तमिल नाडु और कर्नाटक कांग्रेस को दो दिशाओं में खींच रहे हैं Cauvery dispute - कैवेरी विवाद, दक्षिण भारत में एक ऐसा मुद्दा है जो कांग्रेस पार्टी…

Cauvery dispute: How Tamil Nadu and Karnataka are pulling Congress in two directions

कैवेरी विवाद: कैसे तमिल नाडु और कर्नाटक कांग्रेस को दो दिशाओं में खींच रहे हैं

Cauvery dispute – कैवेरी विवाद, दक्षिण भारत में एक ऐसा मुद्दा है जो कांग्रेस पार्टी के विरोधी बन गया है। यह विवाद कर्नाटक और तमिल नाडु के बीच जल संसाधनों के बंटवारे पर चल रहा है और दोनों राज्यों में कांग्रेस के बीज बोए गए हैं। आज इस विवाद के कारण कांग्रेस के नेता दोनों राज्यों में अपने स्थानीय विरोधियों के खिलाफ अपनी राजनीति के दिशा बदल रहे हैं, जिसके कारण पार्टी को दो दिशाओं में खींच रहे हैं।

कैवेरी जल विवाद क्या है?

कैवेरी जल विवाद भारत के सबसे लंबे समय तक चले राज्यान्तर नदी जल विवादों में से एक है। इस विवाद का मुख्य केंद्र राज्यों के बीच जल के विभाजन पर है, जो दक्षिण भारत के करीब 150 लाख लोगों के खेती, पीने के पानी और जीविका के लिए महत्वपूर्ण है।

इस विवाद के मूल लगभग 150 साल पहले शुरू हुए। 1892 और 1924 के बीच मद्रास प्रेसिडेंसी और मिसौर के राज्य के बीच आए समझौते के बाद राज्यों के बीच जल बंटवारा के नियम बनाए गए। इस नियम के अनुसार, नदी के ऊपरी क्षेत्र (अब कर्नाटक) को बड़े योजना आवश्यकताओं के लिए तमिल नाडु की सहमति प्राप्त करना आवश्यक था।

विवाद के विस्तार और प्रमुख मोड़

1974 के बाद से विवाद गहरा हो गया जब कर्नाटक ने तमिल नाडु के अनुमति के बिना नई बांध निर्माण कार्य शुरू कर दिया। तमिल नाडु का आरोप था कि यह नीचले क्षेत्र में जल उपलब्धता को कम कर रहा है, जो खेती आधारित अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है। इस विवाद के कारण दोनों राज्यों के बीच रोजगार और राजनीतिक खिंचाखिच बना रहता है।

1990 में केंद्र ने इंटर-स्टेट राज्य जल विवाद तिब्बत (CWDT) की स्थापना की। इस तिब्बत के द्वारा जल बंटवारा के सूत्र के बारे में चर्चा करते हुए, 2007 में राज्यों के बीच एक समझौता पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौता के बाद भी विवाद के नए मोड़ आए, जिसे आगे ले जाने के लिए केंद्र ने कई बार परिणामों को अधिसूचित करने का प्रयास किया।

कैवेरी विवाद के आधुनिक अवतार और राजनीतिक प्रभाव

2013 में केंद्र ने इस सूत्र को अधिसूचित कर दिया लेकिन उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। 2018 में न्यायालय ने कैवेरी विवाद के रोल ऑन के फैसले में एक नया मानक स्थापित किया, जिसके बाद दोनों राज्यों में विवाद के आंतरिक प्रभाव देखे जा सकते हैं। कैवेरी विवाद के चलते, कांग्रेस के नेता दोनों राज्यों में बार-बार निर्णय लेने के लिए जीत रहे हैं जो उनके स्थानीय राजनीतिक विरोधियों को आगे बढ़ा रहे हैं।

इस विवाद के कारण दोनों राज्यों के नेता अपने विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं। कर्नाटक क

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