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Tahir Hussain gives first public reaction after being sentenced to life in prison

Charles Williams - thedeshpost.com 1 min read 4 views

तहिर हुसैन ने जीवन भर की जेल की सजा के बाद दी पहली प्रतिक्रिया Thedeshpost.com – नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने मौत की सजा की मांग की थी, लेकिन कोर्ट…

Tahir Hussain gives first public reaction after being sentenced to life in prison

तहिर हुसैन ने जीवन भर की जेल की सजा के बाद दी पहली प्रतिक्रिया

Thedeshpost.com – नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने मौत की सजा की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने पांचों आरोपियों को जीवन भर की जेल की सजा सुनाई। पूर्व आम आदमी पार्टी के काउंसिलर तहिर हुसैन ने शुक्रवार को घोषणा की कि वे दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी सजा और दोषसिद्धि को चुनौती देंगे।

कोर्ट का निर्णय और तहिर की प्रतिक्रिया

कारकड़ूमा कोर्ट ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह के नेतृत्व में पांचों आरोपियों को जीवन भर की जेल की सजा सुनाई। तहिर हुसैन के साथ शाह आलम, मेहताब, गुल फिरोज और मोहम्मद रियां को भी इसी तरह की सजा मिली।

“मैं हाईकोर्ट से न्याय पाऊंगा,” तहिर हुसैन ने पत्रकारों को बताया।

दिल्ली पुलिस ने इस मामले को “दुर्लभतम से दुर्लभ” मामला बताया और मौत की सजा की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट ने निर्णय लिया कि अभियोजन पक्ष ने यह साबित नहीं किया कि दोषी सुधार की संभावना से परे हैं।

अभियोजन की तर्कशक्ति

विशेष सार्वजनिक वकील मधुकर पंडेय ने कोर्ट में तर्क दिया कि शर्मा की हत्या पूर्व-योजनाबद्ध और अत्यंत क्रूर थी। उन्होंने बताया कि आईबी अधिकारी को 51 चोटें लगीं, जिनमें से सात व्यक्तिगत रूप से मौत का कारण बन सकती थीं।

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि शर्मा, जो निहथे थे, भीड़ द्वारा घेर लिए गए। उन्हें बार-बार पीटा गया, गले में कप बांधकर खींचा गया और अंततः एक नाली में फेंक दिया गया।

पंडेय ने यह भी तर्क दिया कि तहिर हुसैन, जो दंगों के दौरान AAP काउंसिलर थे, के पास नागरिकों की रक्षा करने का सार्वजनिक कर्तव्य था। फिर भी, वे उस साजिश में शामिल हुए जिसके परिणामस्वरूप शर्मा की हत्या हुई।

बचाव पक्ष की दलीलें

तहिर के वकील राजीव मोहन ने मौत की सजा के खिलाफ तर्क दिया। उन्होंने कहा कि हर हत्या के मामले में मौत की सजा नहीं दी जा सकती। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष ने कोई साजिश साबित नहीं की और तहिर की कोई विशिष्ट भूमिका नहीं बताई।

घटना का पृष्ठभूमि

यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुए साम्प्रदायिक दंगों से संबंधित है। इन दंगों में 50 से अधिक लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए। 26 वर्षीय आईबी कर्मचारी अनkit शर्मा का शव तहिर के निवास के पास एक नाली से बरामद किया गया था।

तहिर हुसैन ने हमेशा इन आरोपों से इनकार किया है और वे दिल्ली हाईकोर्ट में फैसले की चुनौती देने वाले हैं।

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