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Air India pilots may fly until 65, eyes on fleet expansion

Published ஆகஸ்ட் 31, 2026 · Updated ஆகஸ்ட் 31, 2026 · By Linda Brown - thedeshpost.com

Foto : Linda Brown - thedeshpost.com

एयर इंडिया के पायलट अब 65 वर्ष की आयु तक उड़ान भर सकेंगे — फ्लीट विस्तार की तैयारी में बड़ा बदलाव

Thedeshpost.com – भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मोड़ आने वाला है। टाटा समूह के अधिग्रहण के बाद एयर इंडिया अपनी विमान फ्लीट को कटिपुत रूप से विस्तारित करने की तैयारी में जुटी है, और इसी संदर्भ में पायलटों की सेवानिवृत्ति आयु को 58 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष तक किया जा रहा है। यह कदम केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि एक रणनीतिक आवश्यकता है — क्योंकि नए विमानों की माँग के साथ-साथ अनुभवी उड़ान चालकों की कमी को पूरा करना अब प्राथमिकता बन गया है।

सेवानिवृत्ति आयु में बदलाव का संदर्भ

दीर्घकाल से एयर इंडिया अपने पायलटों को 58 वर्ष की आयु पर सेवानिवृत्ति देती आई है। हालाँकि, निदेशालय जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के नियमों के तहत पायlटों को 65 वर्ष तक उड़ान भरने की अनुमति है। विश्व भर की अधिकांश बड़ी एयरलाइनें भी इसी उच्च आयु सीमा का पालन करती हैं। इस अंतर को दूर करने के लिए एयर इंडिया ने अब एक औपचारिक नीति जारी की है जो चुनिंदा पायलटों को अतिरिक्त पाँच वर्षों की सेवा की अनुमति देती है।

यह निर्णय टाटा समूह के नेतृत्व में एयर इंडिया के पुनर्गठन का एक प्रमुख पहलू है। हाल ही में एक अनुभवी उड्डयन पेशेवर को एयर इंडिया के MD-CEO पद के लिए सुरक्षा अनुमोदन प्रदान किया गया है, जो समूह की विस्तार योजनाओं को और गति देता है। इसी कड़ी में एयरबस A350 को वाइड-बॉडी श्रेणी के लिए चुना जा चुका है, और सिंगल-एइसल विमानों का चयन भी शीघ्र ही किया जाएगा।

नीति का औपचारिक आधार

29 जुलाई को जारी की गई "सेवानिवृत्ति के पश्चात पायलटों की नियुक्ति पर नीति" में एयर इंडिया के मुख्य मानव संसाधन अधिकारी (CHRO) एस.डी. त्रिपाठी ने स्पष्ट रूप से इस कदम की औचित्यता समझाई है।

"हमारी फ्लीट के भविष्य के विस्तार योजनाओं को ध्यान में रखते हुए, पायलटों के लिए कार्यबल आवश्यकताओं को पूरा करना अपरिहार्य है। DGCA पायलटों को 65 वर्ष की आयु तक उड़ान भरने की अनुमति देता है, जबकि एयर इंडिया की सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष है। 65 वर्ष तक उड़ान भरने की अनुमति उड्डयन उद्योग में अधिकांश एयरलाइनों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रथा है। अपनी आवश्यकता को पूरा करने के लिए, यह प्रस्तावित है कि एयर इंडिया के वर्तमान प्रशिक्षित पायलटों को सेवानिवृत्ति के पश्चात अनुबंध आधार पर 5 वर्षों के लिए, 65 वर्ष तक विस्तारयोग्य, रखा जाए।"

चयन प्रक्रिया और समिति की भूमिका

हर पायलट को स्वतःस्फूर्त रूप में यह अतिरिक्त अवधि नहीं मिलेगी। एयर इंडिया ने एक कठोर स्क्रीनिंग प्रक्रिया स्थापित की है जो अगले दो वर्षों में सेवानिवृत्ति प्राप्त करने वाले पायलटों की पात्रता का मूल्यांकन करेगी। इस प्रक्रिया के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा जिसमें मानव संसाधन, संचालन और उड़ान सुरक्षा के कार्यात्मक प्रतिनिधि शामिल होंगे।

"मानव संसाधन, संचालन और उड़ान सुरक्षा के कार्यात्मक प्रतिनिधियों से समन्वित एक समिति का गठन किया जाएगा जो अगले दो वर्षों में सेवानिवृत्ति प्राप्त करने वाले पायलटों की पात्रता का परीक्षण करेगी। समिति पायलटों के अनुशासन, उड़ान सुरक्षा और सतर्कता के संबंध में उनके पूर्व रिकॉर्ड की समीक्षा की जिम्मेदारी लेगी। समीक्षा के पश्चात, समिति छानबीन किए गए नामों की सिफारिश CHRO को करेगी ताकि उन्हें सेवानिवृत्ति के पश्चात अनुबंध जारी किया जा सके।"

अनुबंध की शर्तें और वार्षिक समीक्षा

सेवानिवृत्ति से एक वर्ष पूर्व ही पायलट को उनके पश्च-सेवानिवृत्ति संलग्नता हेतु एक इरादा-पत्र (letter of intent) जारी किया जाएगा। वास्तविक अनुबंध पाँच वर्षों के लिए होगा, जो 65 वर्ष तक विस्तारयोग्य होगा। इस अनुबंध में वार्षिक समीक्षा की एक धारा शामिल होगी जो प्रदर्शन, आचरण और उड़ान सुरक्षा रिकॉर्ड के आधार पर अनुबंध की समीक्षा करेगी। पाँच वर्षों की सन्तोषजनक सेवा पूर्ण होने पर, उनके प्रदर्शन का व्यापक परीक्षण करके 65 वर्ष तक आगे विस्तार पर विचार किया जाएगा — और यह निर्णय उक्त समिति द्वारा ही लिया जाएगा।

प्रशासनिक और प्रतीकात्मक पहलू

नीति में एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण प्रावधान भी शामिल है: हवाई अड्डे प्रवेश पास और कंपनी आईडी कार्ड के उद्देश्यों के लिए, पायलटों के आवेदन फॉर्म में उनकी सेवानिवृत्ति तिथि तब दर्ज होगी जब वे वास्तव में 65 वर्ष की आयु प्राप्त करेंगे। इससे पश्च-सेवानिवृत्ति संलग्नता के समय पर समय पर AEP (Airport Entry Pass) नवीनीकरण/वितरण सुनिश्चित होगा।

उड्डयन उद्योग पर प्रभाव और व्यापक संदर्भ

यह नीति भारतीय उड्डयन क्षेत्र के लिए एक प्रतीकात्मक बदलाव है। टाटा समूह के अधिग्रहण के बाद एयर इंडिया को न केवल अपनी फ्लीट को आधुनिकीकृत करना है, बल्कि एक विश्व-स्तर की एयरलाइन के रूप में प्रतिस्पर्धी भी बनना है। इसके लिए अनुभवी पायलटों का भंडार अत्यंत महत्वपूर्ण है — नए विमानों, विशेषकर वाइड-बॉडी जेटों, को चलाए जाने में कई वर्षों का प्रशिक्षण और अनुभव आवश्यक होता है। 58 वर्ष पर अचानक सेवानिवृत्ति इस अनुभव को नष्ट कर देती थी, जबकि 65 वर्ष तक की सीमा अनुभव के निरंतर प्रवाह को बनाए रखती है।

वैश्विक स्तर पर, यूनाइटेड, एयर फ्रांस, ब्रिटिश एयरलाइंस और अन्य प्रमुख वाहक लंबे समय से 65 वर्ष की आयु सीमा का पालन कर रहे हैं। भारत में DGCA के नियम भी इसी दिशा में हैं, परंतु एयर इंडिया की पुरानी 58 वर्ष की सीमा एक अंतर्निहित नीतिगत बाधा थी। अब यह बाधा हट गई है, और इससे भारतीय उड्डयन उद्योग में अनुभवी पायलटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि संभव होगी।

अंतिम शब्द में, यह कदम एयर इंडिया के भविष्य की उड़ान — शाब्दिक और आकृतिगत दोनों अर्थों में — को सुरक्षित और स्थायी बनाए रखने की दिशा में एक आवश्यक और समयोचित कदम है।

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